बौद्ध धर्म

बौद्ध धर्म भारत की श्रमण परम्परा से निकला धर्म और दर्शन है। इसके प्रस्थापक महात्मा बुद्ध शाक्यमुनि (गौतम बुद्ध) थे
महात्मा बुद्ध का जन्म ई. पूर्व में कपिलवस्तु के निकट लुम्बिनी में हुआ था। बुद्ध के बचपन का नाम सिद्धार्थ था। बुद्ध के पिता शुद्धोधन शाक्य गणराज्य के शासक थे। उनकी माता का नाम महामाया था। माता की मृत्यु के बाद मौसी प्रजापति गैतमी ने उनका पालन-पोषण किया।
बुद्ध का विवाह यशोधरा से हुआ था। यशोधरा से जन्में उनके पुत्र का नाम राहुल था। महात्मा बुद्ध ने अपना उपदेश सारनाथ में दिया, जो धर्मचक्रप्रवर्तन कहलाता है। छठी शताब्दी ईसा पूर्व के धार्मिक आंदोलन में बौद्ध धर्म सर्वाधिक महत्वपूर्ण था। बौद्ध धर्म के त्रिरत्न हैं - बुद्ध, धस्म एवं संघ।
बौद्ध धर्म ने ईश्वर को नहीं माना गया है। नैतिकता पर बल दिया गया है।
बौद्ध धर्म के सिद्धांत चार आर्यसत्य पर आधारित हैं - दुःख है, दुःख का कारण है, दुःख का निदान है और दुखः निदान के उपाय हैं। बौद्ध धर्म में वेदों की प्रमाणिकता को अस्वीकार किया गया है।
बौद्ध संघ भिक्षुओं के मार्गदर्शन के लिए महात्मा बुद्ध ने बौद्ध संघ की स्थापना की। बौद्ध संघ में भिक्षुओं के प्रवेश को उपसम्पदा कहा जाता था। गृहस्थ जीवन में रहकर बौद्ध धर्म को मानने वाले उपासक कहलाते थे।
पहले बौद्ध संघ में महिलाओं को प्रवेश नहीं दिया गया, किन्तु आनंद के कहने पर महिलाओं के लिए अलग से बौद्ध संघ की स्थापना की गई।

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