पादप आकारिकी ( plant morphology ) आकारिकी ( plant

विभिन्न पादप भागो जैसे -- जड़ , तना , पत्ती , पुष्पफल आदि के रूपों तथा गुणों के अध्ययन कोआकारिकी कहते है।  
जड़ ( root) 
  • ·       जड़ पोधो का अवरोही भाग है , जोमुलांकुर से विकसित होता है।  
  • ·       जड़ सदैव प्रकाश से दूर भूमि में वृद्धिकरती है।  

जड़ दो प्रकार की होती है -- 
(1) मुसला जड़ ( tap root) 
(2) अपस्थानिक जड़ ( adventitious root ) 
तना ( stem)
·       यह पौधे का वह भाग है जो प्रकाश की और वृद्धिकरता है।  
·       यह प्रांकुर से विकसित होता है।  यह पौधे का प्ररोहतंत्र बनता है।  
·       पत्ती ( leaf )
·       यह हरे रंग की होती है।  इसका मुख्य कार्य प्रकाश -संश्लेषण क्रिया के द्वारा भोजन बनाना है।  
पुष्प ( flower ) 
·       यह पौधे का जनन अंग है।  
·       पुष्प में बाह्य दलपुंज , दलपुंजपुसंग , और जायंगपाए जाते है।  इनमे से पुमंग नर जननांग तथाजायंग मादा जननांग है।  
·       पुमंग -- पुमंग में एक या एक से अधिक पुंकेसर होतेहै।  पुंकेसर में परागकण पाए जाते है।  
·       जायंग -- इसमें अंडप होते है।  अंडप के तीन भागहोते है -- 
(1) अंडाशय   ( Overy ) 
(2) परागकोष   ( style )
(3) वर्तिकाग्र  ( Stigma )
परागण : परागकोष से निकलकर अंडप केवर्तिकाग्र पर परागकणों के पहुंचने की क्रिया कोपरागण कहते है।  परागण दो प्रकार से होता है ---
(1 ) स्व - परागण ( Self - pollination )             
(2) पर - परागण ( Cross - pollination) 
निषेचन ( fertilization) : परागनली बीजाण्डमें प्रवेश करके बीजांडकाय को भेदती हुई भ्रूणकोषतक पहुँचती है और परागकणों को वह छोड़ देतीहै।  इसके बाद एक नर युग्मक एक अंडकोशिका संयोजन करता है।  इसे निषेचन कहते है।  निषेचितअण्ड युग्मनज ( zygote) कहलाता है।  
·       आवृतबीजी में निषेचन त्रिक संलयन जबकि अन्यवर्ग के पोधो में द्विसंलयन होता है।  
·       अनिषेक फलन : कुछ पोधो में बिना निषेचन हुए हीअंडाशय से फल बन जाता है।  इस प्रकार बिनानिषेचन हुए फल के विकास को अनिषेक फलनकहते है।  साधारणतया  प्रकार के फल बीज रहितहोते है।  जैसे -- केला , पपीता ,नारंगी , अंगूर एवंअनन्नास आदि। 
·       फल का निर्माण 
·       फल का निर्माण अंडाशय से होता है।  
सम्पूर्ण फलो को तीन भागो में बिभाजित कियागया है - 
1. सरल फल : जैसे -- अमरुद , केलाआदि।  
2. पुंज फल : जैसे -- स्ट्राबेरी , रसभरीआदि 
3. सग्रंथित फल : जैसे --- कटहल , शहतूतआदि 
·       कुछ फलो के निर्माण में बाह्य दलपुंज , दलपुंज , यापुष्पासन आदि भाग लेते है ऐसे फलो को असत्यफल कहते है।  जैसे -- सेब , कटहल आदि। 

Post a Comment

0 Comments